Bhartiy Kisan Union Bhanu
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लाइलाज बीमारियों की औषधि है "बथुआ "

अन्य · 28 Nov 2022

लाइलाज बीमारियों की औषधि है "बथुआ "
#लाइलाज बीमारियों की औषधि है "बथुआ "
बथुआ खाने के फायदे और उपयोग.  
             

       " सागों का सरदार है बथुआ,सबसे अच्छा आहार है बथुआ।,,
  बथुआ को अंग्रेजी में Lamb's Quarters कहते हैं।
इसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium album है।

     साग और रायता बना कर बथुआ अनादि काल से खाया जाता रहा है, लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की पुस्तक शिल्प शास्त्र में लिखा है कि हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरा रंग करने के लिए पलस्तर में बथुआ मिलाते थे?

      हमारी बुजुर्ग महिलायें फाँस (डैंड्रफ) साफ करने के लिए बथुए के पानी से बाल धोया करती थीं।

      बथुआ गुणों की खान है और भारत में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां हैं तभी तो हमारा भारत महान है।

            "बथुए में क्या-क्या है ......? 
 अर्थात कौन-कौन से विटामिन और मिनरल्स हैं ?

          तो सुनें,बथुए में क्या है।

     बथुआ विटामिन *B1, B2, B3, B5, B6, B9 और C* से भरपूर है तथा बथुए में *कैल्शियम,लोहा,मैग्नीशियम,मैगनीज,फास्फोरस,पोटाशियम,सोडियम व जिंक* आदि मिनरल्स हैं।

100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं।

 कुल मिलाकर 43 Kcal होती है।

      जब बथुआ मट्ठा, लस्सी या दही में मिला दिया जाता है तो यह किसी भी मांसाहार से ज्यादा प्रोटीन वाला व किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ से ज्यादा सुपाच्य व पौष्टिक आहार बन जाता है। साथ में बाजरे या मक्का की रोटी, मक्खन व गुड़ की डली हो तो इसे खाने के लिए देवता भी तरसते हैं।

       जब हम बीमार होते हैं तो आजकल डाक्टर सबसे पहले विटामिन की गोली खाने की सलाह देते हैं। गर्भवती महिला को खासतौर पर विटामिन बी, सी व आयरन की गोली बताई जाती है। बथुए में ये सब कुछ है। 
कहने का तात्पर्य है कि बथुआ पहलवानों से लेकर गर्भवती महिलाओं तक, बच्चों से लेकर बूढों तक, सबके लिए अमृत समान है !

     बथुआ का साग प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी नहीं होती। बथुआ अमाशय को बलवान बनाता है, गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है। बथुए के साग का सही मात्रा में सेवन किया जाए तो निरोग रहने के लिए सबसे उत्तम औषधि है।

     बथुए का सेवन कम से कम मसाले डालकर करें। नमक न मिलाएँ तो अच्छा है,यदि स्वाद के लिए मिलाना पड़े तो काला नमक मिलाएँ और देशी गाय के घी से छौंक लगाए। बथुए का उबला हुआ पानी अच्छा लगता है। तथा दही में बनाया हुआ रायता स्वादिष्ट होता है।

      #किसी भी तरह बथुआ नित्य सेवन करें  

   बथुए में जिंक होता है जो कि शुक्रवर्धक होता है। बथुआ कब्ज दूर करता है और अगर पेट साफ रहेगा तो कोई भी बीमारी शरीर में लगेगी ही नहीं ताकत और स्फूर्ति बनी रहेगी। कहने का मतलब है कि जब तक इस मौसम में बथुये का साग मिलता रहे नित्य इसकी सब्जी खाए।

    बथुये का रस, उबाला हुआ पानी पियें तो यह खराब लीवर को भी ठीक कर देता है। पथरी हो तो एक गिलास कच्चे बथुए के रस में शक्कर मिलाकर नित्य पिए तो पथरी टूटकर बाहर निकल आएगी। मासिक धर्म रुका हुआ हो तो दो चम्मच बथुए के बीज एक गिलास पानी में उबालें, आधा रहने पर छानकर पी जाए, तुरंत लाभ होगा। आँखों में सूजन, लाली हो तो प्रतिदिन बथुए की सब्जी खाएँ। पेशाब के रोगी बथुआ आधा किलो, पानी तीन गिलास, दोनों को उबालें और फिर पानी छान लें। बथुए को निचोड़कर पानी निकाल कर यह भी छाने हुए पानी में मिला लें। स्वाद के लिए नींबू , जीरा, जरा सी काली मिर्च और काला नमक डाल लें और पी जाए।

    आप ने अपने दादा-दादी से ये कहते जरूर सुना होगा कि हमने तो सारी उम्र अंग्रेजी दवा की एक गोली भी नहीं ली उनके स्वास्थ्य व ताकत का राज यही बथुआ ही है।

मकान को रंगने से लेकर खाने व दवाई तक बथुआ काम आता है।
हाँ अगर सिर के बाल धोते हैं, क्या करेंगे शेम्पू 
इसके आगे......
लेकिन अफसोस !

   #हम ये बातें भूलते जा रहे हैं और इस दिव्य पौधे को नष्ट करने के लिए अपने-अपने खेतों में रासायनिक जहर डालते हैं। तथाकथित कृषि वैज्ञानिकों (अंग्रेज व काले अंग्रेज) ने बथुए को भी कोंधरा, चौलाई, सांठी, भाँखड़ी आदि सैकड़ों आयुर्वेदिक औषधियों को खरपतवार की श्रेणी में डाल दिया है और हम भारतीय चूँ भी न कर पाये।
     याद रहे बथुआ साग नहीं , औषधि है ।
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