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31 Dec 2025

जैविक अरहर खेती

जैविक अरहर खेती
जैविक अरहर दाल (तूर दाल) की खेती में रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया जाता, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और कीट-रोग नियंत्रण के लिए जैविक खाद (गोबर की खाद), फसल चक्रहरी खाद, और प्राकृतिक तरीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे यह दाल पौष्टिक और पर्यावरण-अनुकूल बनती है. यह नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और कम पानी में भी उगाई जा सकती है, जिससे किसानों को मुनाफा होता है और उपभोक्ताओं को शुद्ध उत्पाद मिलता है. 
जैविक अरहर खेती के मुख्य पहलू:
  1. मिट्टी की तैयारी: खेत की गहरी जुताई करें और अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद (लगभग 15-20 टन प्रति एकड़) मिट्टी में मिलाएं, जिससे मिट्टी को पोषण मिले और जल निकासी अच्छी हो.
  2. बीजोपचार (Seed Treatment): बुवाई से पहले बीजों को ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) जैसे जैविक फफूंदनाशक से उपचारित करें, ताकि फसल में रोग न लगें.
  3. बुवाई का समय: जून-जुलाई (मानसून की पहली बारिश के बाद) अरहर की बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय है.
  4. सिंचाई और जल निकासी: अरहर को अधिक पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन जलभराव से बचाने के लिए उचित जल निकासी का प्रबंध ज़रूरी है.
  5. पोषण प्रबंधन (Nutrition Management): रासायनिक उर्वरकों की जगह कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट या कम्पोस्ट चाय का प्रयोग करें. अरहर स्वयं नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती है.
  6. कीट और रोग नियंत्रण (Pest & Disease Control): नीम तेलकीटनाशक साबुन या हाथ से कीट हटाना जैसे तरीके अपनाएं. एफिड्स और इल्ली जैसे कीटों के लिए जैविक उपाय करें.
  7. सहयोगी फसलें (Companion Crops): फसल चक्र अपनाएं या अरहर को अनाज के साथ मिलाकर बोएं. 
फायदे (Benefits):
  • स्वास्थ्यवर्धक: रासायनिक अवशेषों से मुक्त, परिवार के लिए सुरक्षित.
  • पर्यावरण-अनुकूल: मिट्टी की उर्वरता और जैव विविधता को बढ़ावा देती है.
  • आर्थिक लाभ: कम लागत, शुद्ध उत्पादन और अधिक मुनाफा. 
जैविक अरहर दाल की खेती से न केवल शुद्ध और पौष्टिक दाल मिलती है, बल्कि यह खेती को टिकाऊ और लाभदायक भी बनाती है.
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