30 Aug 2022
लिखता मैं किसान के लिए
लिखता
मैं किसान के लिए
मैं लिखता
इंसान के लिए
नहीं लिखता
धनवान के लिए
नहीं लिखता
मैं भगवान के लिए
लिखता
खेत खलियान के लिए
लिखता
मैं किसान के लिए
नहीं लिखता
उद्योगों के लिए
नहीं लिखता
ऊँचे मकान के लिए
लिखता
हूँ सड़कों के लिए
लिखता
मैं इंसान के लिए
क़लम मेरी
बदलाव बड़े नहीं लाई
नहीं उम्मीद
इसकी मुझे
खेत खलियान
में बीज ये बो दे
सड़क का
एक गढ्ढा भर देती
ये काफ़ी
इंसान के लिए
लिखता
हूँ किसान के लिए
लिखता
मैं इंसान के लिए
आशा नहीं
मुझे जगत पढ़े
पर जगत
का एक पथिक पढ़े
फिर लाए
क्रांति इस समाज के लिए
इसलिए
लिखता मैं दबे-कुचलों के लिए
पिछड़े
भारत से ज़्यादा
भूखे भारत
से डरता हूँ
फिर हरित
क्रांति पर लिखता हूँ
फिर किसान
पर लिखता हूँ
क्योंकि
लिखता
मैं किसान के लिए
लिखता
मै इंसान के लिए